इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चीनी मांझे पर कार्रवाई को नाकाफी कहा, SOP बनाने का निर्देश
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चीनी मांझे (पतंग उड़ाने वाली डोर) की बिक्री और उपयोग को रोकने के लिए पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों को नाकाफी कहा। कोर्ट ने सरकार को SOP तैयार करने और निरंतर निगरानी के लिए कड़ी हिदायत दी, जबकि अगली सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित है।
कोर्ट की टिप्पणी और आदेश
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने डॉ. कमल कुमार जायसवाल द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के बाद स्पष्ट निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि सरकार के हलफनामे में उल्लेखित कार्रवाई के बावजूद, अखबारों में लगातार आम नागरिकों के चीनी मांझे से घायल होने की खबरें आती रहती हैं।
सतत SOP की आवश्यकता
कोर्ट ने पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि यदि अभी तक कोई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) नहीं बनी है, तो उसे तुरंत तैयार किया जाए। साथ ही, मौजूदा स्थायी व्यवस्थाओं और उनकी प्रभावशीलता के बारे में कोर्ट को नियमित रूप से रिपोर्ट करनी होगी।
वर्तमान स्थिति और प्रतिबंध
‘चाइनीज मांझा’ को उसके खतरनाक स्वभाव के कारण पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका है, फिर भी यह बाजारों में उपलब्ध है। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताते हुए कहा कि केवल एक बार की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; निरंतर और प्रभावी कदमों की जरूरत है।
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आगामी सुनवाई
कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक, पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई, SOP की स्थिति और परिणामों की पूरी जानकारी कोर्ट को प्रस्तुत की जाए। यह सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित है।
मुख्य बातें
- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चीनी मांझे की बिक्री रोकने में पुलिस की कार्रवाई को नाकाफी कहा।
- कोर्ट ने SOP तैयार करने और निरंतर रिपोर्टिंग का आदेश दिया।
- ‘चाइनीज मांझा’ पहले ही प्रतिबंधित है, फिर भी बाजार में उपलब्ध है।
- अगली सुनवाई 3 दिसंबर को तय, जहाँ कार्रवाई की प्रगति पर चर्चा होगी।




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