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2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था: भारत को 8‑9% वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 17 Oct 2026• अपडेट 17 Oct 2026
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2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था: भारत को 8‑9% वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी
भारत का लक्ष्य 2047 तक 4 ट्रिलियन डॉलर से 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है। इसके लिए अगले दो दशकों में 8‑9% वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर बनाए रखने की जरूरत होगी,…

भारत ने 2047, यानी स्वतंत्रता के 100 साल पर, अपनी अर्थव्यवस्था को 4 ट्रिलियन डॉलर से 30 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिये अगले दो दशकों में 8‑9% की वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर बनाए रखना अनिवार्य है, जैसा कि सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने बताया।

वर्तमान आर्थिक प्रदर्शन

जून तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 7.8% की वृद्धि दर्ज हुई, जो बाजार की अपेक्षाओं से बेहतर रही। इस वृद्धि को भारत की सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में पहचाना गया है। गर्ग ने कहा कि इस गति को बनाए रखने के लिये निरंतर सुधार और नीति‑हस्तक्षेप आवश्यक होंगे।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। विश्व बैंक ने भी अपने अनुमान को 6.6% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि बाहरी संस्थाएँ भी भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को मान्यता दे रही हैं।

‘पाथवेज टू विकसित भारत’ – नई मापदंडों की तैयारी

श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के एक कार्यक्रम में गर्ग ने बताया कि सरकार ‘सिस्टम ऑफ नेशनल अकाउंट्स’ (SNA) के अपडेटेड ढांचे के तहत आर्थिक मापन में तीन नए क्षेत्रों को शामिल करने पर विचार कर रही है:

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  • डेटा को एसेट के रूप में देखना – आर्थिक गतिविधियों को संपत्ति‑आधारित दृष्टिकोण से मापना।
  • प्राकृतिक संसाधनों की कमी – पर्यावरणीय क्षति और संसाधन उपयोग को आर्थिक आँकड़ों में प्रतिबिंबित करना।
  • लोगों की भलाई (वेल‑बीइंग) – स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन गुणवत्ता आदि को आर्थिक संकेतकों में शामिल करना।

इन नए मापदंडों को विकसित करने का काम अगले दो‑तीन वर्षों में जारी रहेगा, और 2029‑30 तक इन्हें लागू करने की योजना है। यह कदम संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग द्वारा अनुमोदित ‘SNA 2025’ को भारत में अपनाने के बाद का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसे मार्च 2025 में आधिकारिक रूप से अपनाया गया था।

विकसित भारत के व्यापक मानदंड

‘सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस’ के अध्यक्ष लवीश भंडारी ने कहा कि जीडीपी केवल आर्थिक प्रदर्शन का एक पैमाना है, जबकि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में खुशी, स्वास्थ्य, स्थिरता और जीवन की गुणवत्ता जैसे मानवीय पहलू भी शामिल हैं। इस दृष्टिकोण से नीतियों को केवल आर्थिक वृद्धि पर नहीं, बल्कि सामाजिक‑पर्यावरणीय संतुलन पर भी केंद्रित होना चाहिए।

मुख्य बातें

  • भारत का 2047 लक्ष्य: 4 ट्रिलियन डॉलर से 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था।
  • आवश्यक वार्षिक वृद्धि दर: 8‑9% (अगले 20 साल)।
  • जून तिमाही में जीडीपी वृद्धि: 7.8% (उम्मीदों से बेहतर)।
  • IMF और विश्व बैंक के नवीनतम अनुमान: क्रमशः 7% और 7.1% (FY 2027)।
  • नए मापदंड: एसेट‑आधारित डेटा, प्राकृतिक संसाधन कमी, वेल‑बीइंग।
  • इन मापदंडों का कार्यान्वयन लक्ष्य: 2029‑30 तक।
  • ‘विकसित भारत’ के मानदंड में सामाजिक‑पर्यावरणीय संकेतकों का समावेश।

आगे का रास्ता

गर्ग ने कहा कि भारत को अगले दो दशकों में निरंतर नीति‑सुधार, निवेश माहौल को सुदृढ़ करना और सामाजिक‑पर्यावरणीय संकेतकों को आर्थिक आँकड़ों में सम्मिलित करने की आवश्यकता होगी। यदि इन कदमों को सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में स्थान मिलने की संभावना मजबूत होगी।

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