राजनाथ सिंह के आरोपों पर कांग्रेस का तीखा जवाब, पवन खेड़ा ने 1977 की याद दिलाई
3 मिनट में पढ़ें

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने शुक्रवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बांग्लादेश जैसी अराजकता की तुलना वाले आरोपों पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को सत्ता से हटने का डर सताता है, और विपक्ष का उद्देश्य चुनावों के माध्यम से सरकार बदलना है।
राजनाथ सिंह के आरोपों का खंडन
राजनाथ सिंह ने हाल ही में विपक्ष पर यह आरोप लगाया था कि वे बांग्लादेश जैसी घटनाओं से प्रेरित होकर देश में अराजकता फैला कर सत्ता हासिल करना चाहते हैं। पवन खेड़ा ने इस बयान को “भ्रामक” कहा और कहा कि लोकतंत्र में चुनाव के माध्यम से सत्ता परिवर्तन ही वैध तरीका है। उन्होंने कहा, “जब विपक्ष अपनी बात खुलकर रख रहा है, तो ऐसे आरोप लगाना अनावश्यक है।”
विपक्ष का स्पष्ट उद्देश्य
खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस “वोट चोर, गद्दी छोड़” अभियान चला रही है और यह अभियान देश में व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का लक्ष्य सरकार को चुनाव में हराकर सत्ता से हटाना है, और इसमें कोई छिपा हुआ इरादा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में चुनाव ही सरकार बदलने का एकमात्र साधन है।
1977 की याद दिलाते हुए
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने 1977 के सत्ता परिवर्तन का उल्लेख किया, जब भारत ने एक बड़े राजनीतिक बदलाव का अनुभव किया था। उन्होंने कहा, “क्या उस समय सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ था? जब विपक्ष सड़कों पर उतरता है और आंदोलन करता है, तो सरकार बदलने की मांग उठना स्वाभाविक है।” इस संदर्भ में उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को 1977 के इतिहासिक बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि आज भी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से सत्ता परिवर्तन संभव है।
आपके लिए संबंधित खबरें
मुख्य बातें
- राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर बांग्लादेश‑समान अराजकता का आरोप लगाया।
- कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने इस आरोप को खारिज कर लोकतंत्र में चुनाव के माध्यम से सत्ता परिवर्तन को वैध बताया।
- खेड़ा ने “वोट चोर, गद्दी छोड़” अभियान का उल्लेख किया और कहा कि विपक्ष का लक्ष्य चुनावों से सरकार बदलना है।
- 1977 के सत्ता परिवर्तन का उदाहरण देते हुए उन्होंने वर्तमान में भी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के महत्व पर बल दिया।
भविष्य की संभावनाएँ
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राजनीतिक माहौल में यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों पक्षों के बीच चुनावी रणनीतियों और सत्ता परिवर्तन के मुद्दे पर तीव्र बहस जारी रहेगी। विपक्ष का दावा है कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सत्ता में बदलाव लाने के लिए तैयार हैं, जबकि सरकार के प्रतिनिधि इस बात को चुनौती देते हुए विपक्ष के इरादों को अराजकता के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।




टिप्पणियाँ
0