महाराष्ट्र MLC चुनाव में महायुति गठबंधन में बगावत: शिंदे की शिवसेना बनाम बीजेपी
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महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) के पाँच सीटों के चुनाव की तैयारियों के बीच महायुति गठबंधन के भीतर गंभीर बंटवारा सामने आया है। शिंदे की शिवसेना ने प्रमुख सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन दिया, जबकि अमरावती और छत्रपति संभाजीनगर में भी गठबंधन के तालमेल में दरार दिखी। इस स्थिति को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच वर्चुअल बैठक का प्रस्ताव रखा गया है।
मुख्य सीटों पर उभरे मतभेद
पुणे टीचर्स सीट
पुणे टीचर्स सीट पर शिंदे की शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार कौस्तुभ गावड़े के खिलाफ उद्योग मंत्री उदय सामंत के पूर्व ओएसडी सचिन सानप को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में समर्थन करने का ऐलान किया। शिंदे ने पहले अपने करीबी मंगेश चिवटे को एबी फॉर्म देकर नामांकित करने की कोशिश की, परन्तु बाद में नामांकन वापस लेना पड़ा। शुक्रवार को शिवसेना ने सानप के प्रचार में सक्रिय भागीदारी की घोषणा की, जिससे गठबंधन के भीतर चुनावी रणनीति पर तनाव बढ़ा।
अमरावती टीचर्स सीट
अमरावती टीचर्स सीट पर शिंदे गुट की शिवसेना ने किरण सरनाइक को अपना उम्मीदवार घोषित किया। वहीं, बीजेपी के तीन नेताओं ने निर्दलीय रूप में नामांकन दाखिल किया, जिससे मुकाबला बहुकोणीय हो गया। यह कदम गठबंधन के भीतर मतों के बंटवारे की आशंका को और बढ़ा रहा है, क्योंकि दोनों दलों के समर्थक अब एक ही सीट पर अलग‑अलग उम्मीदवारों को समर्थन दे रहे हैं।
छत्रपति संभाजीनगर ग्रेजुएट सीट
छत्रपति संभाजीनगर ग्रेजुएट सीट पर राष्ट्रीय जनता पार्टी (एनसीपी) के नेता सतीश चव्हाण को फिर से उम्मीदवार बनाया गया है। हालांकि, एनसीपी के शरदचंद्र पवार गुट और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) दोनों ने अलग‑अलग प्रत्याशी उतारे हैं। इस सीट पर शिंदे की शिवसेना ने चव्हाण को समर्थन नहीं दिया, जिससे एनसीपी के उम्मीदवार के सामने चुनौती बढ़ी। स्थानीय स्तर पर पिछले महानगरपालिका चुनाव में शिवसेना के उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के कारण शिवसेना के पदाधिकारी नाराज़ थे, जो इस निर्णय के पीछे का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
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गठबंधन के भीतर तालमेल पर सवाल
पुणे, अमरावती और छत्रपति संभाजीनगर में सामने आए मतभेद महायुति गठबंधन के भीतर समन्वय को कमजोर कर रहे हैं। शिंदे की शिवसेना द्वारा निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देना, जबकि बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों को बनाए रखने की कोशिश करना, दोनों दलों के बीच रणनीतिक असहमति को दर्शाता है। इस स्थिति को देखते हुए, दोनों पक्षों के प्रमुख नेताओं के बीच शुक्रवार को वर्चुअल बैठक का प्रस्ताव रखा गया है। बैठक में उम्मीदवारों की स्थिति, मतभेदों का समाधान और आगामी चुनाव में सहयोगी रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
मुख्य बातें
- पुणे टीचर्स सीट पर शिवसेना ने उद्योग मंत्री के पूर्व ओएसडी सचिन सानप को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में समर्थन किया।
- अमरावती टीचर्स सीट पर बीजेपी के तीन नेताओं ने निर्दलीय नामांकन किया, जिससे शिवसेना के उम्मीदवार की स्थिति कमजोर हुई।
- छत्रपति संभाजीनगर ग्रेजुएट सीट पर शिवसेना ने एनसीपी के सतीश चव्हाण को समर्थन नहीं दिया, जिससे उनके सामने नई चुनौती उत्पन्न हुई।
- गठबंधन के भीतर मतभेद को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच वर्चुअल बैठक का प्रस्ताव है।
आगे क्या हो सकता है?
यदि महायुति गठबंधन के भीतर मतभेद सुलझ नहीं पाए, तो आगामी MLC चुनाव में दोनों दलों के बीच प्रतिस्पर्धा तीव्र हो सकती है। शिवसेना के निर्दलीय समर्थन से बीजेपी के वोट बैंक में विभाजन की संभावना है, जबकि एनसीपी को भी अपने उम्मीदवार के समर्थन में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। गठबंधन के प्रमुख नेताओं की बैठक के परिणामों पर निर्भर करेगा कि क्या सीट‑वार समझौते संभव हो पाएंगे या चुनावी मैदान में नई गठबंधन रेखाएँ उभरेंगी।




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