Skip to content
Friday, 16 October 2026|India
16 Octआज की खबरें
ऐप डाउनलोड
🔴 ब्रेकिंग न्यूज़
सुप्रीम कोर्ट में महुआ मोइत्रा की सर्किट हाउस ठहराव याचिका पर सुनवाई•प्रधानमंत्री मोदी ने एशियाई खेलों के पदक विजेताओं से की मुलाकात, भारत ने 85 पदकों से बनाया इतिहास•लाहौल-स्पीति में बर्फबारी के कारण कई प्रमुख सड़कें बंद, दारचा-शिंकुला व ग्राम्फू-बाटल मार्ग अवरुद्ध•दिवाली से पहले चीनी की कीमतों में 14‑17% उछाल, उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ•मुंबई पुलिस ने अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस जारी•गुरुग्राम में गौ तस्कर शाहिद की मुठभेड़ में मौत, दो आरोपी फरार•नोएडा में बदलते मौसम का अलर्ट: तेज हवाएँ और हल्की‑मध्यम बारिश की संभावना•परविंदर सिंह झोटा मर्डर के विरोध में पंजाब बंद, लद्दाख में 3350 करोड़ के पाँच प्रोजेक्ट्स का उद्घाटनसुप्रीम कोर्ट में महुआ मोइत्रा की सर्किट हाउस ठहराव याचिका पर सुनवाई•प्रधानमंत्री मोदी ने एशियाई खेलों के पदक विजेताओं से की मुलाकात, भारत ने 85 पदकों से बनाया इतिहास•लाहौल-स्पीति में बर्फबारी के कारण कई प्रमुख सड़कें बंद, दारचा-शिंकुला व ग्राम्फू-बाटल मार्ग अवरुद्ध•दिवाली से पहले चीनी की कीमतों में 14‑17% उछाल, उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ•मुंबई पुलिस ने अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस जारी•गुरुग्राम में गौ तस्कर शाहिद की मुठभेड़ में मौत, दो आरोपी फरार•नोएडा में बदलते मौसम का अलर्ट: तेज हवाएँ और हल्की‑मध्यम बारिश की संभावना•परविंदर सिंह झोटा मर्डर के विरोध में पंजाब बंद, लद्दाख में 3350 करोड़ के पाँच प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन
विज्ञापन
Home » शारदीय नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की कथा और आरती का महत्व
News

शारदीय नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की कथा और आरती का महत्व

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 16 Oct 2026• अपडेट 16 Oct 2026
GB News India ऐप डाउनलोड करेंGoogle Play Store पर उपलब्ध
शारदीय नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की कथा और आरती का महत्व
शारदीय नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा, कथा और आरती के विशेष महत्व को समझें। विवाह की बाधाओं से मुक्ति, सुख‑समृद्धि और शक्ति का आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन…

शारदीय नवरात्रि का छठवां दिन, जो इस वर्ष शुक्रवार, 16 अक्टूबर को पड़ता है, मां कात्यायनी को समर्पित है। इस दिन की पूजा‑अर्चना से विवाह की बाधाएं दूर होती हैं, जीवन में सुख‑समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।

मुख्य बातें

  • छठवें दिन मां कात्यायनी की आरती और कथा पढ़ना विशेष फलदायी माना जाता है।
  • विवाह में अड़चनें दूर करने, सुयोग्य वर की प्राप्ति और जीवन में शक्ति व साहस पाने के लिए इस दिन की पूजा की जाती है।
  • मां कात्यायनी को सिंह पर सवार, चार भुजाओं वाली, एक हाथ में तलवार, दूसरे में कमल, शेष दो हाथों में अभय और वरमुद्रा के रूप में दर्शाया जाता है।
  • पौराणिक कथा के अनुसार महर्षि कात्यायन की तपस्या से देवी दुर्गा ने पुत्री के रूप में जन्म लिया, जिससे उनका नाम कात्यायनी पड़ा।
  • महिषासुर के वध में मां कात्यायनी की भूमिका को महिषासुरमर्दिनी के रूप में भी याद किया जाता है।

मां कात्यायनी की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने कई वर्षों तक कठिन तपस्या की, जिससे देवी दुर्गा ने उनकी मनोकामना स्वीकार कर अपनी पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस कारण देवी को कात्यायनी कहा गया। एक अन्य कथा में बताया गया है कि राक्षस महिषासुर के अत्याचार से सभी देवता पीड़ित थे। तब देवी दुर्गा का एक स्वरूप प्रकट हुआ, जिसने महिषासुर का वध किया। महर्षि कात्यायन ने इस देवी की प्रथम पूजा की थी, इसलिए उन्हें कात्यायनी कहा गया।

मां कात्यायनी की आरती

छठवें दिन मां कात्यायनी की आरती का पाठ भक्तों द्वारा किया जाता है। आरती के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:

जय जय अम्बे, जय कात्यायनी, जय जगमाता, जग की महारानी। बैजनाथ स्थान तुम्हारा, वहां वरदाती नाम पुकारा। कई नाम हैं, कई धाम हैं, यह स्थान भी तो सुखधाम है। हर मंदिर में जोत तुम्हारी, कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी। कात्यायनी रक्षक काया की, ग्रंथि काटे मोह माया की। झूठे मोह से छुड़ाने वाली, जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।

आपके लिए संबंधित खबरें

आरती के अंत में “बृहस्पतिवार को पूजा करियो, ध्यान कात्यायनी का धरियो” जैसे वाक्यांशों से भक्तों को निरंतर ध्यान और समर्पण की सलाह दी जाती है।

पूजा विधि और लाभ

छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा में आमतौर पर निम्नलिखित चरण अपनाए जाते हैं:

  1. सफाई और शुद्धता के साथ पूजा स्थल तैयार करें।
  2. मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र के सामने जल, फूल और फल अर्पित करें।
  3. कथा पढ़ें या सुनें, जिससे उनकी महिमा का ज्ञान बढ़े।
  4. आरती के शब्दों का उच्चारण करते हुए दीप जलाएँ।
  5. प्रार्थना में विवाह की बाधाओं से मुक्ति, सुख‑समृद्धि और शक्ति की कामना करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विधि से नकारात्मकता दूर होती है, जीवन की बाधाओं से लड़ने की शक्ति मिलती है और विशेष रूप से विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं।

निष्कर्ष

शारदीय नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की कथा और आरती का पाठ न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की आशा भी प्रदान करता है। यदि आप इस दिन की पूजा‑अर्चना को सच्चे मन से करते हैं, तो मान्यता है कि कष्ट दूर होंगे और सुख‑समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook X Telegram
💬 0 टिप्पणियाँ

टिप्पणियाँ

0

अपनी टिप्पणी लिखें

Your email address will not be published. Required fields are marked *