दिग्विजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में SIR अनियमितताओं की याचिका दायर की, चुनाव आयोग को नोटिस
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका के जवाब में कोर्ट ने चुनाव आयोग (EC) और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिससे इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधता पर व्यापक चर्चा शुरू हुई।
याचिका का पृष्ठभूमि और मुख्य बिंदु
दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने 12 अक्टूबर को संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने SIR प्रक्रिया के माध्यम से बड़े पैमाने पर मतदाता नामों को हटाने और जोड़ने के एकाधिकार को उजागर किया। उन्होंने कहा कि सॉफ्टवेयर के प्रयोग से नामों को काटने‑जोड़ने की प्रक्रिया में पक्षपात हो रहा है और यह साइबर‑क्राइम का नया रूप बन गया है।
मुख्य आरोप
- सॉफ्टवेयर द्वारा मतदाता सूची में नामों को जोड़ने‑कटने का एकाधिकार, जिससे 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए।
- बीजेपी के पक्ष में नाम कटने‑जोड़ने की प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए 25‑50 आवेदन का उपयोग किया गया।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को प्रक्रिया में पक्षपात करने और दो अन्य चुनाव आयुक्तों से सलाह लिये बिना निर्णय लेने का आरोप।
- विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने दिग्विजय सिंह की याचिका को स्वीकार कर ली और चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। नोटिस में दोनों पक्षों को SIR प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज़, निर्णय और कार्यप्रणाली प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। यह कदम प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता की जांच के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
विपक्ष और सरकार की प्रतिक्रियाएँ
इंडिया गठबंधन ने भी सुप्रीम कोर्ट में समान मुद्दों को उठाते हुए याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने SIR प्रक्रिया में कई अनियमितताओं को उजागर किया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनका व्यक्तिगत याचिका भारत गठबंधन की याचिका के साथ मिलकर प्रक्रिया को चुनौती देती है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अभी तक अपने उत्तर को सार्वजनिक नहीं किया है।
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मुख्य बातें
- दिग्विजय सिंह ने 12 अक्टूबर को SIR अनियमितताओं पर रिट याचिका दायर की।
- सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर चुनाव आयोग और केंद्र को नोटिस जारी किया।
- दिग्विजय सिंह का दावा है कि सॉफ्टवेयर के माध्यम से 13 करोड़ से अधिक मतदाता नाम हटाए गए।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता अधिकारों से वंचित करने का आरोप।
- विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद आगे की सुनवाई और दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया तय होगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि SIR प्रक्रिया में वास्तविक अनियमितताएँ हैं या नहीं। यह मामला भारतीय लोकतंत्र में मतदाता अधिकारों की सुरक्षा के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण परीक्षण बन गया है।




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