डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जयंती: अखबार बेचने से मिसाइल मैन और राष्ट्रपति तक का सफर
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर उनके जीवन के प्रमुख चरणों को याद किया गया। बचपन में आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अखबार बेचकर अपना परिवार सहारा। इस मेहनत ने उन्हें दृढ़ता और आत्मविश्वास सिखाया, जो बाद में उनके वैज्ञानिक करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अखबार बेचने के दिन
रौली में जन्मे कलाम ने अपने शुरुआती वर्षों में सुबह-शाम अखबार वितरित किया। यह काम न केवल आर्थिक मदद करता था, बल्कि उन्हें लोगों के साथ संवाद करने और समय प्रबंधन की कला सिखाता था।
वैज्ञानिक बनने की यात्रा
शिक्षा के प्रति उनका उत्साह उन्हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तक ले गया। उन्होंने भारत के पहले सैटेलाइट प्रोग्राम में योगदान दिया और बाद में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई सफल मिसाइल प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया, जिससे उन्हें “मिसाइल मैन” का खिताब मिला।
राष्ट्रपति पद तक
विज्ञान में उनके योगदान के बाद, 2002 में उन्हें भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना गया। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने शिक्षा, विज्ञान और युवा प्रेरणा के क्षेत्रों में कई पहलें शुरू कीं।
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मुख्य बातें
- डॉ. कलाम ने बचपन में अखबार बेचकर आर्थिक मदद की।
- वे इसरो और डीआरडीओ में प्रमुख वैज्ञानिक रहे।
- उनकी प्रमुख उपलब्धियों में अग्नि, पृथ्वी और त्रिशूल मिसाइल प्रोजेक्ट शामिल हैं।
- 2002‑2007 तक भारत के राष्ट्रपति रहे।
- उनकी जीवन कहानी मेहनत, लगन और नवाचार का प्रतीक है।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती हमें यह याद दिलाती है कि कठिनाइयों के बावजूद दृढ़ संकल्प और निरंतर सीखने की इच्छा से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनका जीवन भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।




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