संसदीय समिति ने स्टारलिंक सहित सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की मंजूरी में देरी की जांच का आदेश
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संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थायी संसदीय समिति ने बुधवार को स्टारलिंक सहित अन्य सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लाइसेंस प्रक्रिया में देरी के कारणों की जांच को प्राथमिकता दी। यह कदम एलन मस्क द्वारा भारत में स्टारलिंक की एंट्री में सरकारी मंजूरी में देरी पर उठाए गए सवालों के बीच उठाया गया।
समिति की बैठक और मुख्य निर्णय
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी बैठक में सैटेलाइट इंटरनेट को मुख्य विषय के रूप में चुना। समिति ने सरकार से इस क्षेत्र में अपने‑अपने पक्ष प्रस्तुत करने को कहा और आवश्यकता पड़ने पर निजी कंपनियों से भी जानकारी मांगी।
स्टारलिंक के अलावा किन कंपनियों ने आवेदन किया
निशिकांत दुबे के अनुसार, एलन मस्क की स्टारलिंक के अलावा यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट ने भी भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस की मंजूरी हेतु आवेदन किया है। जियो सैटेलाइट रिलायंस जियो का सैटेलाइट वेंचर है, जबकि यूटेलसैट वनवेब को एयरटेल का समर्थन प्राप्त है। दोनों कंपनियां वर्तमान में मोबाइल और ब्रॉडबैंड नेटवर्क प्रदान कर रही हैं।
एलन मस्क के आरोप और प्रतिस्पर्धा का मुद्दा
एलन मस्क ने पहले कहा था कि भारत में स्टारलिंक की एंट्री में देरी का कारण कुछ हितधारकों द्वारा इंटरनेट सेवा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को रोकने की कोशिश है। इस बयान के बाद समिति ने इस विषय को बारीकी से जांचने का निर्णय लिया।
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बैठक में उठाए अन्य मुद्दे
- कांग्रेस सांसदों ने चुनाव आयोग की ECINet प्रणाली की कार्यप्रणाली और एक्सेस लॉग्स की जांच की मांग की।
- SIR (सेंटरल इंटेलिजेंस रेज़ॉल्यूशन) से जुड़े संवैधानिक मुद्दे को समिति ने संवैधानिक संस्था के कारण चर्चा से बाहर रखा।
- विपक्षी सांसदों ने दिल्ली के लुटियन जोन में मोबाइल नेटवर्क की समस्या को भी उठाया।
मुख्य बातें
- संचार और सूचना प्रौद्योगिकी स्थायी समिति ने सैटेलाइट इंटरनेट को प्राथमिक जांच विषय बनाया।
- स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।
- एलन मस्क ने सरकारी मंजूरी में देरी को प्रतिस्पर्धा रोकने का आरोप लगाया।
- समिति सरकार और निजी कंपनियों दोनों से पक्ष सुनने की योजना बना रही है।
- बैठक में ECINet, SIR और दिल्ली के मोबाइल नेटवर्क समस्याओं पर भी चर्चा हुई।
समिति ने कहा कि आगे की जांच के बाद रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत की जाएगी, जिससे सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की मंजूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित की जा सके।




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