जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध स्थल से हटाया: 300 साल के इतिहास पर नई दिशा
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दिल्ली के प्रतिष्ठित जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध स्थल की सूची से हटाया गया है। 1724 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित यह खगोलीय वेदशाला, जो पिछले तीन दशकों से विभिन्न प्रदर्शन और विरोध का केंद्र रहा, अब डी‑नोटिफाई कर दिया गया।
जंतर-मंतर का इतिहास और प्रदर्शन स्थल के रूप में विकास
जंतर-मंतर का निर्माण 1724 में हुआ था और यह मूलतः खगोलीय विज्ञान के अध्ययन के लिए बनाया गया था। 1990 के दशक से यह स्थल संसद के निकट होने के कारण विभिन्न सामाजिक‑राजनीतिक आंदोलनों का प्रमुख मंच बन गया। शुरुआती दौर में बोट क्लब विरोध का केंद्र था, पर 1988 में किसानों के बड़े प्रदर्शन के बाद 1993 में इसे जंतर-मंतर में स्थानांतरित कर दिया गया। तब से यह स्थल विभिन्न राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों पर जनता की आवाज़ बनता रहा।
अक्टूबर 2026 में जारी स्टैंडिंग ऑर्डर
दिल्ली पुलिस ने अक्टूबर 2026 में एक स्टैंडिंग ऑर्डर जारी किया, जिसमें जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध स्थल की सूची से हटाने का आदेश दिया गया। इस आदेश के साथ, पुलिस ने तीन वैकल्पिक स्थानों को विरोध के लिए मान्य स्थल घोषित किया:
- रामलीला मैदान
- बुराड़ी ग्राउंड
- पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड
इन स्थानों को भविष्य में सार्वजनिक विरोध और प्रदर्शन के लिए उपयोग करने की अनुमति दी गई है, जबकि जंतर-मंतर को अब केवल एक ऐतिहासिक और वैज्ञानिक स्मारक के रूप में संरक्षित किया जाएगा।
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मुख्य बातें
- जंतर-मंतर का निर्माण 1724 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने किया।
- 1990 के दशक से यह स्थल विभिन्न प्रदर्शन का केंद्र रहा।
- 1988 में किसानों के बड़े प्रदर्शन के बाद 1993 में जंतर-मंतर को विरोध स्थल बनाया गया।
- अक्टूबर 2026 में दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को डी‑नोटिफाई किया।
- वैकल्पिक विरोध स्थल: रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड, सीबीडी ग्राउंड।
जंतर-मंत्र की यह नई स्थिति न केवल ऐतिहासिक स्मारक की सुरक्षा को सुनिश्चित करती है, बल्कि भविष्य में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए अधिक व्यवस्थित और नियोजित स्थानों की भी व्यवस्था करती है।




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