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आईआईटी मद्रास ने 100 से अधिक दिमागों का 3डी एटलस बनाने की पहल

2 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 13 Oct 2026• अपडेट 13 Oct 2026
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आईआईटी मद्रास ने 100 से अधिक दिमागों का 3डी एटलस बनाने की पहल
आईआईटी मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर ने 100 से अधिक पोस्ट‑मॉर्टम दिमागों का हाई‑रिजॉल्यूशन 3डी डिजिटल एटलस तैयार करने की योजना घोषित की। इस परियोजना में स्ट्रोक‑संबंधी बदलाव, बुढ़ापे के प्रभाव…

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर ने 100 से अधिक पोस्ट‑मॉर्टम मानव दिमागों का हाई‑रिजॉल्यूशन 3डी डिजिटल एटलस बनाने की पहल की घोषणा की। यह एटलस दिमाग के विकास, बुढ़ापे और विभिन्न न्यूरोलॉजिकल रोगों के चरण‑दर‑चरण विश्लेषण के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन होगा।

परियोजना का उद्देश्य और दायरा

एटलस में प्रत्येक दिमाग की विस्तृत एमआरआई स्कैन और ऊतक‑स्तर की बारीक तस्वीरें शामिल होंगी। विशेष रूप से स्ट्रोक‑संबंधी दिमागों पर ध्यान दिया गया है, जहाँ 1,000 से अधिक चिह्नित छवियों को एकत्रित किया गया है। इन छवियों के माध्यम से दिमाग में सूजन, ऑक्सीजन की कमी और नसों को हुए नुकसान की पहचान आसान होगी।

तकनीकी सहयोग

परियोजना के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मे.टी.) की सहायता से परम शक्ति सुपरकंप्यूटर का उपयोग किया गया है। इस कार्य में 200 से अधिक शोधकर्ता और तकनीशियन, 10 से अधिक भारतीय चिकित्सा संस्थान और 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोगी शामिल हैं। आर्थिक सहयोग फेयरफैक्स फाइनेंशियल के चेयरमैन प्रेम वत्सा और इंफोसिस के सह‑संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन से प्राप्त हुआ है।

मुख्य बातें

  • 100 से अधिक पोस्ट‑मॉर्टम दिमागों का 3डी एटलस तैयार किया जाएगा।
  • स्ट्रोक‑संबंधी 1,000 से अधिक चिह्नित छवियों को एटलस में शामिल किया गया है।
  • परम शक्ति सुपरकंप्यूटर, 200+ शोधकर्ता, 10+ भारतीय चिकित्सा संस्थान और 30+ अंतरराष्ट्रीय सहयोगी इस परियोजना में भाग ले रहे हैं।
  • फेयरफैक्स फाइनेंशियल और इंफोसिस से आर्थिक समर्थन मिला है।

प्रभाव और संभावित उपयोग

यह एटलस न्यूरोलॉजिकल रोगों के निदान और उपचार में नई दिशा प्रदान करेगा। शोधकर्ता दिमाग के विभिन्न चरणों में होने वाले संरचनात्मक बदलावों को सटीक रूप से ट्रैक कर सकेंगे, जिससे स्ट्रोक, अल्ज़ाइमर और पार्किंसन जैसी बीमारियों की शुरुआती पहचान में मदद मिलेगी। साथ ही, इस डिजिटल मानचित्र का उपयोग मेडिकल शिक्षा में भी किया जा सकता है, जहाँ छात्रों को वास्तविक दिमागीय संरचनाओं का 3डी अनुभव मिलेगा।

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भविष्य की दिशा

आईआईटी मद्रास ने बताया कि एटलस के डेटा को ओपन‑साइंस प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध कराकर वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को सहयोग देने की योजना है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ेगा और नई दवाओं एवं उपचार विधियों के विकास में गति आएगी।

संबंधित सरकारी पहल

यह परियोजना भारत सरकार की स्वास्थ्य‑तकनीकी पहल के अंतर्गत आती है, जहाँ न्यूरो‑साइंस के क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सुपरकंप्यूटर की मदद से बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग संभव हो रही है, जो भविष्य में अन्य जैव‑चिकित्सा परियोजनाओं के लिए मॉडल बन सकती है।

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