बिहार के अस्पतालों में डस्टबीन घोटाला: हाईकोर्ट ने सरकार को 19 नवंबर तक जवाब देने का निर्देश
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पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को बायोमेडिकल वेस्ट निपटान के लिए खरीदे गए माइक्रोवेव डस्टबीन और बायोडिग्रेडेबल बैग की कीमतों पर उठाए गए घोटाले के संबंध में 19 नवंबर 2026 तक जवाब देने का निर्देश दिया। यह मामला बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) द्वारा किए गए टेंडर में बाजार मूल्य से दस गुना अधिक कीमत चुकाने के आरोपों पर आधारित है।
घोटाले के मुख्य बिंदु
- 75 लीटर डस्टबीन की खरीद कीमत 15,490 रुपये बताई गई, जबकि बाजार मूल्य लगभग 1,550 रुपये माना गया।
- 45 लीटर डस्टबीन की कीमत 11,474 रुपये, जबकि बाजार मूल्य 1,162 रुपये के आसपास।
- 75 लीटर बायोडिग्रेडेबल बैग की कीमत 98 रुपये प्रति बैग, जबकि बाजार मूल्य 8.50 रुपये।
- 45 लीटर बैग की कीमत 69 रुपये प्रति बैग, जबकि बाजार मूल्य 5.75 रुपये।
- जून 2024 से 18 अप्रैल 2026 के बीच कुल 57 सप्लाई ऑर्डर जारी, कुल टेंडर मूल्य 307 करोड़ रुपये, जबकि चार अन्य फर्मों के कोटेशन के अनुसार वास्तविक लागत लगभग 29 करोड़ रुपये।
- टेंडर के बाद लखनऊ स्थित ‘एसएस मेडिकल सिस्टम’ को आपूर्ति का ठेका दिया गया।
सुनवाई की पृष्ठभूमि
जनहित याचिका (PIL) दायर करने वाले कौशलेश कुमार के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी के समक्ष इन आरोपों को प्रस्तुत किया। पहले 8 सितंबर को हुई सुनवाई में अदालत ने सरकार को स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। अब 19 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार को अपना विस्तृत जवाब देना होगा।
सरकार का संभावित जवाब
हाईकोर्ट ने अभी तक सरकार की कोई टिप्पणी नहीं सुनी है। अदालत ने कहा कि याचिका में दिये गये सभी दावे अभी आरोप ही हैं; खरीद प्रक्रिया, टेंडर की तकनीकी शर्तें, गुणवत्ता मानक और वास्तविक भुगतान की पुष्टि के बाद ही निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
मुख्य बातें
- डस्टबीन और बैग की कीमतों में 10‑गुना अंतर का आरोप।
- कुल 57 ऑर्डर, 307 करोड़ रुपये का टेंडर, वास्तविक लागत अनुमान 29 करोड़ रुपये।
- हाईकोर्ट ने सरकार को 19 नवंबर 2026 तक जवाब देने का अंतिम समय दिया।
- अगली सुनवाई में मामले की पूरी स्पष्टता की उम्मीद।
यदि सरकार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ और स्पष्टीकरण में कोई असंगति पाई जाती है, तो इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और संभावित दंड का सामना करना पड़ सकता है। इस समय, जनता और मीडिया दोनों ही इस मामले के विकास पर नज़र रखे हुए हैं।




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