जम्मू कश्मीर में पंजाबी भाषा को आधिकारिक दर्जा दिलाने का सिख समुदाय का सातवां प्रदर्शन
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जम्मू कश्मीर में पंजाबी भाषा को आधिकारिक दर्जा दिलाने की मांग पर सिख समुदाय का प्रदर्शन सातवें दिन जारी है। प्रदर्शनकारियों ने जम्मू में महाराजा हरि सिंह की प्रतिमा के सामने एकत्रित होकर सरकार से पंजाबी को राज्य की आधिकारिक भाषाओं में शामिल करने की अपील की।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
जम्मू एंड कश्मीर ऑफिशियल लैंग्वेजेज एक्ट, 2020 के तहत कश्मीरी, डोगरी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी को आधिकारिक भाषाओं के रूप में मान्यता मिली थी। इस अधिनियम में पंजाबी को शामिल नहीं किया गया, जिससे सिख समुदाय ने असंतोष जताते हुए आंदोलन शुरू किया।
सिख समुदाय की मुख्य मांगें
- पंजाबी को राज्य की आधिकारिक भाषाओं में शामिल करना।
- शिक्षा और सांस्कृतिक स्तर पर पंजाबी भाषा को बढ़ावा देना।
- पंजाबी बोलने वाले लोगों की बड़ी संख्या को मान्यता देना।
मुख्य बातें
- प्रदर्शन सातवें दिन जारी, जम्मू में महाराजा हरि सिंह की प्रतिमा के सामने एकत्रित।
- जम्मू एंड कश्मीर ऑफिशियल लैंग्वेजेज एक्ट, 2020 में पंजाबी को आधिकारिक भाषा नहीं माना गया।
- सिख समुदाय का कहना है कि जम्मू कश्मीर में पंजाबी बोलने वालों की संख्या बड़ी है और उनका ऐतिहासिक‑सांस्कृतिक महत्व है।
- भाषा को शिक्षा और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ावा देने की भी मांग की जा रही है।
भविष्य की संभावनाएँ
सिख समुदाय ने सरकार से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। यदि पंजाबी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता मिलती है, तो यह भाषा‑संबंधी नीतियों में बदलाव और शैक्षणिक संस्थानों में पंजाबी पाठ्यक्रमों के विस्तार को संभव बना सकता है। वर्तमान में आंदोलन जारी है और आगे की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।




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