जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी के आवेदन शुल्क से 114 करोड़ जमा, पदों की संख्या में गिरावट
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जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों से पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 114 करोड़ रुपये से अधिक की आवेदन फीस जमा की गई, जबकि विज्ञापित पदों की संख्या में लगातार गिरावट देखी गई। यह जानकारी विधानसभा के ऑटम सेशन में सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से सामने आई।
आवेदन शुल्क में 114 करोड़ रुपये का संग्रह
वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान जम्मू-कश्मीर पब्लिक सर्विस कमीशन (JKPSC) और जम्मू-कश्मीर सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (JKSSB) ने कुल मिलाकर लगभग 114 करोड़ रुपये आवेदन शुल्क के रूप में एकत्र किए। JKSSB ने इस अवधि में 11,003 नॉन‑गजेटेड पदों के लिए लगभग 89.50 करोड़ रुपये जमा किए, जबकि JKPSC ने 4,961 गजेटेड पदों के लिए लगभग 24.43 करोड़ रुपये प्राप्त किए।
विज्ञापित पदों में लगातार गिरावट
आंकड़ों से स्पष्ट है कि दोनों भर्ती एजेंसियों द्वारा विज्ञापित पदों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है। JKPSC ने 2023-24 में 2,586 पदों का विज्ञापन किया, 2024-25 में यह संख्या 1,400 तक घट गई और 2025-26 में केवल 357 पदों का विज्ञापन किया गया। JKSSB ने 2023-24 में 4,228 पदों का विज्ञापन किया, 2024-25 में यह 5,044 तक बढ़ा, पर 2025-26 में केवल 1,731 पदों तक घट गया।
JKPSC और JKSSB की भूमिका
JKPSC मुख्यतः गजेटेड (सरकारी) पदों की भर्ती करता है, जबकि JKSSB नॉन‑गजेटेड (सेवा) पदों की भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है। दोनों एजेंसियों के माध्यम से विभिन्न विभागों में नौकरियों की विज्ञापन जारी होते हैं, पर हाल के वर्षों में विज्ञापित पदों की संख्या में गिरावट ने उम्मीदवारों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
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मुख्य बातें
- पिछले तीन वित्तीय वर्षों में आवेदन शुल्क के रूप में 114 करोड़ रुपये से अधिक जमा हुए।
- JKSSB ने 89.50 करोड़ रुपये, JKPSC ने 24.43 करोड़ रुपये एकत्र किए।
- JKPSC द्वारा विज्ञापित पदों की संख्या 2,586 से घटकर 357 तक गिर गई।
- JKSSB के विज्ञापित पद 4,228 से घटकर 1,731 रहे।
- आवेदन शुल्क में वृद्धि के बावजूद उपलब्ध पदों में कमी ने उम्मीदवारों में असंतोष उत्पन्न किया।
विधानसभा में प्रस्तुत ये आंकड़े उस समय सामने आए हैं, जब सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच भर्ती प्रक्रिया और उपलब्ध पदों को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। आवेदन शुल्क में बड़ी रकम जमा होने के बावजूद पदों की संख्या में गिरावट ने सरकार को इस पर जवाब देने के लिए मजबूर किया।




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