बरेली में बंदरों के हमले से 39 वर्षीय मजदूर की मौत, परिवार में शोक
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बरेली के कैंट थाना क्षेत्र में बंदरों के लगातार हमलों ने दो परिवारों को शोक में डाल दिया। भौआपुर गांव में 39 वर्षीय धर्मपाल कश्यप को बंदरों के झुंड को भगाने के दौरान छत से गिरना पड़ा, और सिर में गंभीर चोट लगने के बाद देर रात उनकी मौत हो गई। उसी दिन कैंट के चनेटी गांव में 35 वर्षीय पिंटू को भी बंदरों ने काटा, जिससे वह जिला अस्पताल में भर्ती हुए।
धर्मपाल कश्यप की मौत का विवरण
धर्मपाल कश्यप, 39 वर्ष, भौआपुर गांव के निवासी थे और मजदूरी करके अपने पत्नी और चार बच्चों का पालन‑पोषण करते थे। उनके बेटे सुभाष ने बताया कि घर में अचानक बंदरों का झुंड घुस आया। धर्मपाल ने बंदरों को भगाने के लिए छत पर चढ़े, लेकिन बंदरों ने उन्हें दौड़ा दिया। बचने की कोशिश में उनका संतुलन बिगड़ गया और वे छत से नीचे गिर पड़े। गिरते समय सिर में गंभीर चोट लगी।
परिवार ने तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाया, लेकिन देर रात इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। धर्मपाल की मौत से उनकी पत्नी और चार बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, जिससे परिवार में गहरा शोक छा गया।
पिंटू पर बंदरों का हमला
कैंट क्षेत्र में बंदरों के हमले की एक और घटना सामने आई। चनेटी गांव के 35 वर्षीय पिंटू, जो कबाड़ की फेरी कर रहे थे, उनके पास अचानक बंदरों का झुंड आया और एक बंदर ने उनके उल्टे हाथ में काट लिया। शोर मचाने पर आसपास के लोगों ने बंदरों को भगाने में मदद की। पिंटू को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
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स्थानीय प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपाय
बंदरों के लगातार हमलों से ग्रामीणों में डर बना हुआ है। कई लोग बताते हैं कि बंदर घरों की छतों और गलियों में घूमते रहते हैं, जिससे दैनिक जीवन में असुविधा और खतरा बढ़ गया है। स्थानीय प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस उपाय नहीं बताया है, परंतु ग्रामीणों ने पुलिस को स्थिति की सूचना दी है और सुरक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
मुख्य बातें
- भौआपुर गांव में 39 वर्षीय धर्मपाल कश्यप को बंदरों को भगाते समय छत से गिरना पड़ा, सिर में गंभीर चोट लगने से उनकी मौत हो गई।
- धर्मपाल की पत्नी और चार बच्चों को अब परिवार चलाने की बड़ी जिम्मेदारी संभालनी पड़ेगी।
- कैंट के चनेटी गांव में 35 वर्षीय पिंटू को बंदरों ने काटा, वह जिला अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं।
- स्थानीय लोगों ने बताया कि बंदर अक्सर घरों की छतों और गलियों में घूमते हैं, जिससे डर और असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
- पुलिस ने मृतकों के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा, लेकिन अभी तक कोई व्यापक रोकथाम योजना नहीं बताई गई।
बंदरों के हमले से उत्पन्न इस संकट को सुलझाने के लिए स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और पुलिस के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।




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